पहली नजर मै मुझे तुमसे नफरत हो गई थी,
तेरी आहट से मुझे तेरी पहचान हुई थी
तुने तो मेरी दिन हो या रात की नींद खराब कर दी
मुझे तुमसे ही नही तुम्हारी पुरी प्रजाती से नफरत हो गई है
मुझे अब तुमसे डर लगने लगा है
क्योंकि सोती हु तो निंदो मै भी तू आने लगा है
तुझे डराने के लिए मैने क्या क्या नही किया
बँट लेके सोती हु, अंधेरा किया, कॉइल लगाया, हाय स्पीड पर फॅन भी लगाया
तू तो डरने का नाम ही नही लेता है
कंबल लेकर सोती हुँ तो घुंइग घुइंग करके फिर से मेरी नींद खराब करता है
अरे क्या करू तेरा अब दिमाग नही चलता है
मेरी पिछली जन्म की सजा है तू, ये शैतान बता दे किस चीज का बना है
नींद पुरी ना होने से मुझे आणे लगे है चक्कर
मेरी जिंदगी से दफा हो जा ये जालीम मच्छर
क्या दिन है मेरे और क्या राते है मेरी मुझे तुझपर कविता करणी पडी
रात के तीन बजे है काट काटकर मेरी क्या हालत बनादी है
ये मच्छर दया कर मुझपर खोल दि है मैने खिडकी जीले अपनी जिंदगी
जा खुली हवा मे सैर कर, तेरी मौत का इंन्जाम ना लगा इस गरीब के सिर पर.
हमारे गाव पर मच्छर नही होते है मै पहिली बार शादी करके शहर मे आये तो यहा हमारे घर मे बहुत मच्छर होते थे और अभी भी है; सुरुवात मे मुझे मच्छर काटले तो एलर्जीसी होती थी मी रोने लगते थी अभ मुझे आदत होने लगी है पर फिर भी हम हमारे यहा मच्छर बोहोत होते है और जोर से काटते भी है मच्छरो की वजह से नींद नही आ रही थी इसलिये चलो इस मच्छर पर कुछ लिखते है इसलिये मैने कुछ लिखा पसंद आया तो लाईक जरूर करना.थँक्यू 🙏
✍ सौ.शितल पाटील