एक हवा का झोका तेरा पैगाम लेकर आता है
छूकर मेरे तन को तेरा एहसास देकर जाता है
यादो की कडी धूप मै छाँव बनकर रहता है
उलजे हुये बालों को प्यार से सवरता है
तेरे आसपास होने का सबूत देकर जाता है
मेरे चेहरे पर हलकीसी smile छोडकर गुजरता है
क्या ये हवा झोका तेरे पास भी आता है
मेरी याद तूझे भी दिलाता है
भेजा है मेने भी पैगाम आपको इस हवा के झोंके से
आना जरूर हमे मिलने राह आपकी हम देखते है
क्योंकि आप यहाँ नही होते तो परछाई से भी हमे डर लगता है
आपके करीब होने से बहुत ही Safety feel होता है
रूठे सारा जमाना पर तू कभीना रूठना
जब तक रहेगी सास मेरी, तबतक मेरे साथ रहना.
बस मेरी परछाई बनकर मेरे साथ चलना.
✍ सौ. शितल पाटील