इंसान एक पहेली है
जितनी भी सुलजाने की कोशिश करो उतनी ही उलझ जाती है
कितनी भी सवारने की कोशिश कर ले बिखर जाती है
कितनी भी बदलने की कोशिश करो वापस वही की वही रह जाती है
क्योंकि; कोई खुद को बदलना नहीं चाहता है
मगर दूसरोंसे बदलने की उम्मीद करता रहता है
वाह रे वाह तेरी सोच को मेरा सलाम
गलती खुद करता है और इन्जाम किसी ओर पर लगाता है
सबका हिसाब यही होगा
सोच ले तेरा भी नंबर ज़रूर होगा