एक कडवा सच

साथ वहीं निभाते है जो अपने होते है

बाकी सब खोकले होते है

पर जब अपने ही भरोसा तोड जाते है तो परायों से क्या शिकायत करना

क्योंकि शिकायत अपनों से कि जातीं है परायों से नहीं.

पर रिश्ता खून का हो जरूरी नहीं

क्योंकि दिल के रिश्ते खून से बडकर होते है

पराये होकर भी वो अपने बन जाते है

और अपने स्वार्थ की भूख से अपने ही पराये बन जाते है.

✍ सौ. शितल कृष्णा पाटील

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