जो दि दिल मे है वो बेझिजक कहना सीखो सच्चाई है आपमें तो सच्चाई का सामना करना सिखो क्योंकि जो अपनी बात खुलकर कहता है उसे किस बात का डर नहीं रहता और जो नहीं बोल पाता वो अपने आप को तकलीफ मै ढकेल देता है पर इसका दर्द अगनीक होता है उसे कोई ना देख सकता है और नाही कोई समज सकता है वो मन ही मन मै एक डर को पाल लेता है अगर मै बोल दू तो उसे कैसा लगेगा और वो क्या सोचेगा औरों कि सोचना बंद कर लो, अगर वो सचमुच अपने है तो समज जायेंगे और ना समजे तो आप समज जाना वो कभी तुम्हारे हुये ही नही थे सिफ आपको धोके मै रखा………… रिश्तो में सच्चाई हो ना तो रिश्तों कि उम्र काफी लंबी होती है पर झूठ कि छाँव भी जिंदगी भर के रिश्तों को बिखर देती है इसलिए रिश्ता बनाया हो तो सच्चे मन से निभाया करो जो दिल मे है वो बताया करो क्योंकि मन की बात कहने से मन का बोझ कम होता है और रिश्ते और भी गेहरे हो जाते है।